Saturday, June 9, 2018

हृदयंगम - सुहृदय

हृदयंगम - हृदय + गम = हृदय से कभी-भी गम (दुःख) को लगाना नहीं चाहिए ।
सुहृदय - सु + पेशाब = अगर आपकी सु यानि पेशाब अच्छी उतर रही है तो 
आपका हृदय सुहृदय है । यानि आपको कोई दिल की बीमारी नहीं है । 
कोई बी.पी. (ब्लड प्रेशर) की बीमारी नहीं है ।
अगर आपकी पेशाब सही नहीं उतर रही है ।
रुक-रुक कर उतर रही है, उतर नहीं रही है,
जलन होकर उतर रही है, तेजी से उतर रही है,
बार-बार उतर रही है, 
तो आपका हृदय ठीक नहीं है । 
क्योंकि पेशाब जब ठीक से नहीं उतरती है तो वह
वापस खून में फैल जाती है । 
और पेशाब में नमक होता है ।
जिससे नमक फिर खून में उतर जाता है 
और वह खून के माध्यम से हृदय में चला जाता है 
इसलिए व्यक्ति को कभी रात को अचानक पेशाब लगती है
या पेशाब करने के बाद चक्कर आता है तो
यह इसी का परिणाम है कि पेशाब ठीक ढंग से नहीं उतर रही है ।
इसके लिए पानी की जाँच करनी चाहिए ।
क्योंकि पानी अगर सही नहीं है तो पेशाब में समस्या आती है ।
और यही समस्या फिर रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और हृदयाघात (हार्ट अटैक)
का कारण बनती है ।
इसलिए जहाँ तक कोशिश की जाए की पेशाब बराबर आये ।
आौर पेशाब को रोका ना जाए ।
क्योंकि पेशाब को अगर रोका गया तो भी वह वापस ऊपर उठकर
वाष्पित हो जाताी है । और गैस आदि रोग का कारण बनती है ।
तथा पुनः खून में चली जाती है ।
और वही समस्या पैदा करती है ।
इसलिए जहाँ हो सके पेशाब जब आए तब कर लेनी चाहिए ।
इससे हृदय फिर सुहृदय हो जाता है ।
व्यक्ति में चिढ़चिढ़ापन नहीं रहता है ।
क्योंकि जिसकी पेशाब नहीं उतरती है 
वह व्यक्ति चिढ़चिढ़ा भी हो जाता है ।
क्योंकि यही पेशाब गैस का रूप धारण करके उसके दिमाग में घुस जाती है ।
जिससे उसका दिमाग काम नहीं करता है । 
इसलिए व्यक्ति कहता है कि हलका होकर आता हूँ ।
एक बार उसको रास्ता मिल जाता है खून में शामिल होने का और
दिमाग में घुसने का तो फिर उसे संभालना मुश्किल होने लगता है ।
इसलिए ऐसा आने का मौका नहीं देना चाहिए ।
और अपने सु को अच्छा बनाना चाहिए ।